शनिवार, 8 जनवरी 2011

जिंदगी


गुलिस्ता मै घूम लेती हु ,
                   वादा खानों मै घूम लेती हु !
जिंदगी तू  जहां भी मिल जाये ,
                   तेरे कदमो को चूम लेती हु !

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

मंजिल


कदम चूम लेती है आके मंजिल उसकी ,
अगर राही खुद अपनी हिम्मत न हारे !
हार मानता नहीं जो अपनी मंजिल से ,
मंजिले खुद राह बनती जाती हैं !
जिंदगी का सफ़र बहुत ही लम्बा है ,
कोई  हर दम न साथ चलता है !
राही बनके राहों को पता बताते चलो !
अपनी मंजिल को खोजो और आजमाते चलो !

मंगलवार, 4 जनवरी 2011

इंतजार


मुहब्बत मै ये क्या मकाम आ रहेँ हैं ,
के मंजिल पे हैं और चले जा रहेँ हैं !
ये कह - कह के हम दिल को समझा रहेँ हैं ,
वो अब चलें   हैं ........ वो अब आ रहेँ हैं !

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

फासले


  दुरी हुई तो उनके करीब अदा हम हुए !
ये केसे फासले थे , जो बड़ने से कम हुए !!

बुधवार, 29 दिसंबर 2010

पैगाम


फकत मुकद्दर पर जिन्दा रहना ,
           निकम्मापन और बुझदिली है !
अमन की दुनियां मै मेहनत करके ,
            अपना हिस्सा वसूल करलो तुम !
उजड़ जायेगा चमन ये बाक़ी ,
             गर और कांटें न हटाओगे तुम !
गुलिस्तान की गरचे खेर चाहो ,
            तो चंद कांटें कबूल  करलो तुम !

लहू


मैने बताया लाख लहू सबका सुर्ख  है !
                फिर भी उन्होंने देख लिया काट कर मुझे !!