उनकी किस्मत का सितारा इस तरह बुलंद था !
क्युकी जो पड़े लिखे थे वे संतरी बने ,
और जो अंगूठा छाप थे वो मंत्री बने !
चोट पर चोट दिल पे है खाए हुए !
होंठ फिर भी है मुस्कुराए हुए !
म़ोत की वादियों मै बैठा हूँ !
जिंदगी की शमा जलाये हुए !
वो सर बुलंद रहा और खुद पसंद रहा ,
मै सर चुकाए रहा और खुशमदो मै रहा !
मेरे अज़ीज़ो यही दस्तूर है मकानों का ,
बनाने वाला हमेशा बरामदो मै रहा !
तुम्हें गेरों से कब फुर्सत हम गम से कब ख़ाली
चलो हो चूका मिलना न तुम ख़ाली न हम ख़ाली !
मुस्कराहट पर छिपाते हैं जो अपना गम ,
अपनी हालत पे वो गेरो को रुला देते हैं !
क्या करेगा प्यार वो ईमान को ,
क्या करेगा प्यार वो भगवान को !
जन्म लेकर गोद मै इन्सान की ,
कर न पाया प्यार जो इन्सान को !