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भारतीय परम्परा में रामायण तथा महाभारत को अत्यधिक महत्व प्राप्त है | इन्हें उपजीव्य काव्य कहा जाता है | उपजीव्य कहने का अर्थ यह है की ये ग्रन्थ परवर्ती रचनाओं के स्त्रोत रहे हैं | संस्कृत काव्य - परम्परा के अतिरिक्त भारत की दूसरी भाषाओँ के रचनाकारों ने रामायण तथा महाभारत के आधार पर अनगिनत काव्यों की रचना की है | हमारे सांस्कृतिक मानस के निर्माण में इन कृत्यों की उल्लेखनीय भूमिका है |
रामायण को काव्य कहा जाता है और महाभारत को ' इतिहास ' | यहाँ इतिहास का मतलब एसे पूर्ववृत से है जिसके माध्यम से धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष का उपदेश दिया जा सके | रामायण को महाभारत से प्राचीनतर माना जाता है | वाल्मीकि द्वारा रचित ' रामायण ' की कथा से महाभारतकार न केवल परिचित है बल्कि वह रामकथा प्रसंगानुकुल प्रस्तुत भी करता है | रामकथा का वर्णन ' आरण्यक ' द्रोण और ' शांतिपर्व ' में मिलता है |' शांतिपर्व ' में प्राप्त रामोपाख्यान सबसे अधिक विस्तृत है | इसकी व्याख्या शोकाकुल युधिष्ठिर को ऋषि मार्कण्डेय सुनाते हैं | वेद व्यास को महाभारत का रचनाकार माना जाता है | वेद व्यास का पूरा नाम कृष्ण दैव्पायन व्यास है | वे सत्यवती तथा पराशर के पुत्र थे | यमुना के किसी द्वीप में पैदा होने के कारण उन्हें ' ' दैव्पायन ' , शरीर के रंग के कारण ' कृष्ण मुनि ' तथा वेद का सहिंताओं के रूप में विस्तार करने के कारण वेद व्यास कहा जाता है | महाभरत युद्ध और ' महाभारत ' ग्रन्थ की रचना के समय को लेकर विद्वानों में पर्याप्त विवाद है | ज्यादातर माना जाता है की महाभारत की रचना बुद्धपूर्व युग में हो चुकी थी | बुद्ध का समय छठी शताब्दी ईसा पूर्व है |
वर्तमान महाभारत में एक लाख श्लोक मिलते हैं | इसी से इसे शतसहस्त्र संहिता भी कहते हैं | विद्वानों का विचार है की यह किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं हो सकती | दुसरे रचनाकारों ने समय -समय पर इसके कलेवर में वृद्धि की होगी | इस ग्रन्थ के विकास के तीन क्रमिक चरण माने जाते हैं ___ जय , भारत तथा महाभारत | मूल ग्रन्थ ' जय ' के रचनाकार महर्षि वेद व्यास हैं | इसी का विस्तार करते हुए वेश्म्पायन ने ' ' भारत ' तथा सोति ने ' महाभारत ' का प्रणयन किया | महाभारत में अठारह पर्व हैं | अपने वृहदाकार ( बहुत बड़ा आकर ) और तमाम विषयों के समावेश के कारण इसे विश्व कोष कहा जाता है | इस ग्रन्थ की बहुत सी टीकाएँ की गई हैं | इसकी विशालता को लक्षित करके ये कहना उचित जान पड़ता है की ' इस ग्रन्थ में जो कुछ है वह अन्यत्र ( दूसरी जगह ) है , परन्तु जो कुछ इसमें नहीं है वह कहीं और भी नहीं है | ' प्राचीन राजनीती , लोक -व्यव्हार को जानने का सबसे विस्तृत और सरल तरीका ' महाभारत ' ही है | इसे पंचमवेद भी कहा जाता है |
वर्तमान महाभारत में एक लाख श्लोक मिलते हैं | इसी से इसे शतसहस्त्र संहिता भी कहते हैं | विद्वानों का विचार है की यह किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं हो सकती | दुसरे रचनाकारों ने समय -समय पर इसके कलेवर में वृद्धि की होगी | इस ग्रन्थ के विकास के तीन क्रमिक चरण माने जाते हैं ___ जय , भारत तथा महाभारत | मूल ग्रन्थ ' जय ' के रचनाकार महर्षि वेद व्यास हैं | इसी का विस्तार करते हुए वेश्म्पायन ने ' ' भारत ' तथा सोति ने ' महाभारत ' का प्रणयन किया | महाभारत में अठारह पर्व हैं | अपने वृहदाकार ( बहुत बड़ा आकर ) और तमाम विषयों के समावेश के कारण इसे विश्व कोष कहा जाता है | इस ग्रन्थ की बहुत सी टीकाएँ की गई हैं | इसकी विशालता को लक्षित करके ये कहना उचित जान पड़ता है की ' इस ग्रन्थ में जो कुछ है वह अन्यत्र ( दूसरी जगह ) है , परन्तु जो कुछ इसमें नहीं है वह कहीं और भी नहीं है | ' प्राचीन राजनीती , लोक -व्यव्हार को जानने का सबसे विस्तृत और सरल तरीका ' महाभारत ' ही है | इसे पंचमवेद भी कहा जाता है |