बहस से बड़ी कोई बहस नहीं है , धरम से बड़ी कुच्छ की जागीर नहीं है ! ये दुनिया वालो की बनाई हुई हस्ती है , इस पर कोई बहस मुमकिन ही नहीं है ! क्युकी,धरम से बड़ी कोई ज़ंजीर नहीं है !
ये जिंदगी तेरे अंदाज़ से वाकिफ थे हम मगर !
तेरी दुनियां के रंगीन सपनों से बेखबर नहीं थे हम !!
पर क्या करे जो हमसे निभाया न गया ये सब !
पर कोशिश तो हमने भी जी जान से ही की थी !!
कहते हैं हर चीज़ मिल जाती है दुआ से !
इक रोज़ तुझे मांग के देखेंगे खुदा से !!
उसकी दुआ मै न जाने कितना असर होगा !
ये भी जरा आज अजमा के देखेंगे खुदा से !!
यकीं है उसकी दुआ कभी बेअसर न जाएगी !
पर उसपे यकीं तो कम से कम हो ही जायेगा !!
भरोसा टूट जाने पर बहुत तकलीफ होती है !
पहले ही संभल जाएँ तो तकलीफ कम होगी !!