सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

यैस ( हाँ )

तर्क का उद्देश्य केवल तार्किक ढंग से ना कहना होता है |
हम ना कहना चाहतें हैं और फिर उसे सिद्ध करने के लिए 
प्रमाण जुटाते हैं , कारण इकट्ठा करते हैं _ यही तर्क का खेल 
होता है |
यैस ( हाँ ) कभी तार्किक मन को आकर्षित नहीं करता ,
वह केवल हृदय को आकर्षित करता है | और अन्तत: केवल 
हृदय जीतता है , यैस जीतता है _ तर्क कभी नहीं |

रविवार, 13 फ़रवरी 2011

समर्पण का ही दूसरा नाम प्यार


प्रेम में एसी क्या कठिनाई है की लोग गहरे उतर  ही नहीं पाते ?
       शायद कठिनाई है ... खुद का अहंकार |
मनुष्य की पूरी शिक्षा और संस्कृति अहंकार को मजबूत
करती है , समाज भी अहंकार का पोषण करता है और
फिर जब व्यक्ति यह घना अंधकार लेकर प्रेम के जगत
   में प्रवेश करता है तो सम्भवत: फेल हो जाता है | 

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

उत्साह ही जिन्दगी



   गोंरव इस बात मै नहीं की आप कभी असफल नहीं हुए ,
बल्कि इस बात मै है की आप जितनी बार भी असफल हुए ,
    एक नई शुरुवात के लिए फिर  से उठ खड़े हुए !

शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

प्यार

   
 मोह के साथ जीना मुश्किल होता है , 
   लेकिन मोह के बगैर भी जीना 
        आसान नहीं होता !

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

मनुष्य की स्मृति

मनुष्य की स्मृति  अदभुत , मगर भ्रामक उपकरण होती है !
हमारे अन्दर रहने वाली समृति न तो पत्थर पर उकेरी गई 
कोई पंक्ति है और न ही एसी की समय गुजरने के बाद धुल 
जाये , लेकिन अक्सर वो बदल जाती है , या कई बाहरी
आकृति के साथ मिलकर बढ जाती है ! 

सोमवार, 31 जनवरी 2011

शोर



क्या करेगा प्यार वो ईमान को ,
              क्या करेगा प्यार वो भगवान को !
जन्म लेकर गोद मै इन्सान की ,
             कर न पाया प्यार जो भगवान को !