एक नज़र इधर भी
बुधवार, 29 दिसंबर 2010
नाज़
न तुम अपनी बुलंदियों पर नाज़ करो !
हमने सितारों को भी गिरते देखा है !!
कारवां
फुरकत की शाम , दिल की उदासी , तुम्हारी याद !
तन्हाई मै भी कितना बड़ा कारवां हैं हम !!
नजरिया
नेक ने तो नेक बद ने बद जाना मुझे !
हर किसी ने अपने 2 पैमाने से पहचाना मुझे !
हंसी
अनमोल सजावट है ये अनमोल हंसी भी !
बाज़ार मै एसा कोई जेवर न मिलेगा !!
नई सुबह
जलाओ दिए उजाला करो ख्यालों में ,
हर एक दिल की कसक हो तुम्हारे नालों मै !
अँधेरी रात से उठो ख़ुलुसे दिल लेकर ,
कोई पुकार रहा है तुम्हें उजालों मै !!
पैगाम
न समझोगे तो मिट जाओगे ये हिदुस्तान वालों !
तुम्हारी दास्तान भी न होगी दस्तानों मै !!
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