मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

मनुष्य की स्मृति

मनुष्य की स्मृति  अदभुत , मगर भ्रामक उपकरण होती है !
हमारे अन्दर रहने वाली समृति न तो पत्थर पर उकेरी गई 
कोई पंक्ति है और न ही एसी की समय गुजरने के बाद धुल 
जाये , लेकिन अक्सर वो बदल जाती है , या कई बाहरी
आकृति के साथ मिलकर बढ जाती है ! 

सोमवार, 31 जनवरी 2011

शोर



क्या करेगा प्यार वो ईमान को ,
              क्या करेगा प्यार वो भगवान को !
जन्म लेकर गोद मै इन्सान की ,
             कर न पाया प्यार जो भगवान को !

बुधवार, 26 जनवरी 2011

विश्वास


butterfly

ज़माने से जो डरते हैं वो बेकार होते हैं !
बदल देते हैं जो माहोल वो खुद्दार होते हैं !!
हजारो डूबते हैं नाखुदा के भरोसे पर !
चलाते  हैं जो खुद चप्पू वो अक्सर पार होते हैं !!  

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

मन की बात


                            
दुनिया की नजर मै आये !    
                  कितने भेद हमारे मन  के !
तुम भी चुप और हम  भी चुप !
                   खोले कोन किवारे मन के !

सोमवार, 17 जनवरी 2011

वो हूँ मैं



हथेली सामने रखना
के सब आंसू गिरे उसमे
जो ठहर जाये
तो समझ  जाना के 
    " वो हूँ  मैं  "
कभी जो चाँद  को देखो
तो तुम यु मुस्कुरा देना
जो चल जाये हवा ठंडी
तो ऑंखें बंद कर लेना
जो झोंका तेज़ हो सबसे
तो समझ लेना के
      " वो हूँ मैं "
जो ज्यादा " याद " आऊं मैं
तो तुम रो लेना जी भरके
अगर हिचकी कोई आये
तो समझ जाना के
   " वो हूँ मैं "

रविवार, 16 जनवरी 2011

इश्क

53329296, George Marks /Hulton Archive

चमन अच्छा नहीं लगता , कली देखि नहीं जाती !
               गुलों के दरम्याँ तेरी कमी देखि नहीं जाती !
इलाही उनके हिस्से  के भी गम  मुझको अदा कर दे !
              कि उन मासूम आँखों मै नमी देखि नहीं जाती !