रविवार, 16 जनवरी 2011

इश्क

53329296, George Marks /Hulton Archive

चमन अच्छा नहीं लगता , कली देखि नहीं जाती !
               गुलों के दरम्याँ तेरी कमी देखि नहीं जाती !
इलाही उनके हिस्से  के भी गम  मुझको अदा कर दे !
              कि उन मासूम आँखों मै नमी देखि नहीं जाती !

5 टिप्‍पणियां:

mridula pradhan ने कहा…

tareef ke liye shabd hi nahin mil rahe hain.

Amit K Sagar ने कहा…

दूसरों की ख़ुशी के प्रति दिल के भावों को संप्रेषित करती बहुत ही सुन्दर रचना.
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सागर by AMIT K SAGAR

क्षितिजा .... ने कहा…

waah waah !! ... ise kehte hai pyaar ki intahaa ... bahut bhoob :)

Ravindra Ravi ने कहा…

काबिले-तारीफ!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह ... कमाल की नज़्म है ... उनकी आँखों में नमी देखि नहीं जाती ... बहुत खूब ..