रविवार, 8 जनवरी 2012

दर्द


तन्हाइयों में दर्द दस्तक देता है ....
किसी से कुछ भी न कहकर ...
अंदर ही अंदर सुलगता है ....
कोई आह जब भीतर करवट लेती है .....
तो सारे आलम को ये गमगीन करती है ....
ये बेजुबान दर्द ही जीने का सबब बनता है .....
तभी शायद ये हमारे इतने करीब रहता है | :)

8 टिप्‍पणियां:

कुश्वंश ने कहा…

खूबसूरत

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत गहरे भाव लिए सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

mridula pradhan ने कहा…

bahot sunder.....

Pradeep ने कहा…

मिनाक्षी जी प्रणाम !
ख़ुशी तो पल दो पल की होती है ...पर कुछ दर्द तो जिंदगी भर साथ रहते है ...जीने का सबब बन जाते हैं...
मकर सक्रांति पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं ... प्रदीप

avanti singh ने कहा…

कुछ ही पंक्तियों में गहरी बात कहीं आप ने ,बधाई.....पहली बार आप के ब्लॉग पर आना हुआ,उम्मीद है आना जाना लगा रहेगा...... :)

Er. Shilpa Mehta ने कहा…

तभी तो इसे दर्द कहते हैं,
हर एक का अपना है,
हर एक के करीब,
जादूगर भी है यह
अपना तो सबको दीखता है
औरों का रहता है आँखों से ओझल ..........

Srikant Chitrao ने कहा…

वाह ! बड़ी गंभीर बात कितनी सरलता से कही है |बधाई |

सुखदरशन सेखों (दरशन दरवेश) ने कहा…

हमें तो दर्द का साथ अच्छा लगता है |