गुरुवार, 25 नवंबर 2010

चाह

कोंन कहता है उड़ने के लिए................
 पंखो की जरुरत पड़ती है !
उडान तो होंसलो से बुलंद होती है !
वो खुद बन जाते हैं पंख 
जब दिल मै पाने की चाह होती है 

12 टिप्‍पणियां:

daanish ने कहा…

"udaan to hausloN se buland hoti hai"

bilkul theek kahaa aapne
prernaa ke bhaav liye hue
achhii rachnaa . . .

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

उडान तो होंसलो से बुलंद होती है !
वो खुद बन जाते हैं पंख
जब दिल मै पाने की चाह होती है

...
प्रेरक पंक्तियाँ...बधाई. कभी 'शब्द शिखर' पर भी पधारें. यदि आप प्रेम आधारित रचनाएँ लिखती हैं तो 'सप्तरंगी प्रेम' के लिए hindi.literature@yahoo.com पर परिचय व फोटो सहित भेज सकती हैं.

Suman Sinha ने कहा…

waah kya baat hai

एस.एम.मासूम ने कहा…

अति सुंदर और सत्य वचन

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

मीनाक्षी जी, बहुत सुंदर भाव हैं। हार्दिक बधाई।

---------
आपका सुनहरा भविष्‍यफल, सिर्फ आपके लिए।
खूबसूरत क्लियोपेट्रा के बारे में आप क्‍या जानते हैं?

रश्मि प्रभा... ने कहा…

बिना पंखों के उड़नेवाले गिरते नहीं , कभी कोई ठेस लगे तो रुकते नहीं...
बहुत अच्छी रचना

babanpandey ने कहा…

composition with deep meaning//

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत अच्छी रचना|

ZEAL ने कहा…

.

मीनाक्षी जी
नमस्कार।

पहली बार आ रही हूँ आपके ब्लॉग पर । आना सफल हुआ। बहुत अच्छा लगा यहाँ आकर। एक अपनापन सा है यहाँ । शायद विचारों की साम्यता !

@-उडान तो होंसलो से बुलंद होती है....

बेहद प्रेरणादायी पंक्तियाँ !

आभार।
दिव्या

.

Meenu Khare ने कहा…

सुंदर भाव हैं। कम शब्‍दों में बडी बात...विचारणीय प्रस्तुति...

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

वो खुद बन जाते हैं पंख जब दिल मै पाने की चाह होती है .....
बहुत सुन्दर पंक्तियां। बधाई।

Minakshi Pant ने कहा…

आपसबका मै तहे दिल से शक्रिया करती हु दोस्तों ! आज बहुत दिनों बाद यहाँ आई की चलो कुच्छ लिखू पर यहाँ आकर जब आपसबको देखा तो दिल ख़ुशी से झूम उठा की मेरे घर इतने लोग आये और मै बेखबर बेठी रही !
आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद दोस्तों !